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दोस्त और स्कूल की रफ़ कॉपी

Priya KusumPriya Kusum October 6, 2021
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कैसे होते हैं दोस्त ?

मेरी नज़र में होते है स्कूल की रफ़ कॉपी के माफ़िक. 

जैसे रफ़ कॉपी में:

-कुछ भी सजा-सजाकर नहीं लिखना पड़ता,

-हिन्दी, अंग्रेजी, गणित हो या विज्ञान 

हर विषय को साथ में ही लिख सकते हैं, 

-टीचर के लंबे लेक्चर से ऊबकर करते हैं ढन्ग-बेढन्ग से चित्रकारी 

-कभी-कभी आँखो में तैरते भविष्य के सपने भी संजो देते है 

- बयाँ कर देते हैं जवां मन के कई जज़्बात भी 


ऐसे ही तो होते है दोस्त जिनके साथ:

-भाषा और पहनावे की कोई औपचारिकताएं नहीं करनी पड़ती,

-अपनी पसंद-नापसंद, वैचारिक -भावनात्मक द्वंद्व, उल्लास, अवसाद, रोमांच किसी भी विषय पर विमर्श कर सकते हैं,

- जीवन की नीरसता को तोड़ने के नए तरीके तलाश सकते हैं, (कभी -कभी तो अपनी बेसुरी आवाज़ में गाना गाकर भी )

-ख्वाहिशो को पूरा करने का हौसला जुटा सकते हैं 

-साझा कर सकते हैं वो बातें जो किसी और से नहीं कहते हम. 


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