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बदल-सी गयी है

Priya KusumPriya Kusum October 7, 2021
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खाना खाकर प्लेट उठाने में घंटों जिसे लग जाते थे, 

अब एक फ़ोन की घंटी सुनकर वो दौड़ी चली जाती है 


भाई से अपने रिमोट के लिए झगड़ती,

अब बिना मांगे पानी उसे दे आती है 


 चाय भी जो कभी ठीक से ना बना पाई, 

अब जाने किसकी पसंद की खीर बनाती है 


अपने दिखने को लेकर लापरवाह 

और शब्दो में थोड़ी बेपरवाह, 

किसी नए सलीके में अब ढल-सी गयी है 


कल एक लड़की को देखा मैंने आईने में 

वो पहले से अब बदल-सी गयी है. 

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