साक्ष्य's image
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मैं थलचर ,नभचर ,जलचर का


फ्वाॅरेंनशिक सा चिट्ठा हूं


मैं तेल ,चीनी, और आटा,नमक के


भाव दिखाने का शीशा हूं।।




मैं लोकतंत्र और भोगतंत्र के


साक्ष्य दिखाने की गीता हूं


मैं अधिकारों , दायित्वों से दिक


भ्रष्टाचारी के पोल खोलने वस जीता हूं।।




मैं समय अविष्का करता हूं


नित्य नया साक्ष्य को लाता हूं


कहीं कृषि खूशबू को, बदबू में दिखलाता हूं


मॉनसून आगमन-गमन के अतिशय पर मैं ह्रदय से हिल जाता हूं।।




पर मैं कागज सा टुकड़ा हूं

सो षड्यंत्रों में जकड़ा हूं

न्यायिक हिरासत का बकरा हूं

बस दफ़्तर-दफ़्तर रगड़ा हूं


मै साक्ष्य नहीं समर्थ के हाथ खिलौना हूं


पर्वत स्वरूप होकर भी मैं


दोषी के आगे बौना हूं।।




नन्दन अब तुम्ही साक्ष्य बनो


शक्ति का आराध्य करो


दुःखी अकिंचन की आस बनो


धरती का उद्धार करो


तुम न्याय करो, तुम न्याय करो।।




-स्वयं नन्दन ( नन्दन)



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