तुम कुछ और तुम्हारी आंखें कुछ और कहती है।'s image
Love PoetryPoetry1 min read

तुम कुछ और तुम्हारी आंखें कुछ और कहती है।

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर September 4, 2021
Share0 Bookmarks 48 Reads0 Likes

तुम कुछ और तुम्हारी आंखें कुछ और कहती है।

तुम्हारे अंदर एक वीराना है दुनिया को दिखाते हो अंदर पूरी की पूरी बस्ती है।

तुम्हारा अधूरापन साफ नजर आता है,

तुम साथ ना ले चलो इसमें मेरी क्या गलती है।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts