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जिंदगी तूने बहुत दिया मुझे। जितना दिया कोई मलाल नहीं मुझे।

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर January 15, 2023
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जिंदगी तूने बहुत दिया मुझे।

जितना दिया कोई मलाल नहीं मुझे।

जानता हूँ तू भी साथ छोडेगी मेरा एक दिन,

इसका भी कोई मलाल नहीं मुझे।

साथ मिला सबका और कोई साथ ही नहीं,

किससे करते शिकायत कोई मलाल नहीं मुझे।

तमाम उम्र खुद से ही लडते रहे,

क्या सही क्या गलत कोई मलाल नहीं मुझे।

मुझे अपनी तबाही पर भारी दुख है,

इस भूल में रहो तुम कोई मलाल नहीं मुझे।

लोग जख्मो को सारेआम कर देते हैं,

मैं दिखा नहीं सकता कोई मलाल नहीं मुझे।

सुना है अपने ही तोडते अपनो का होसला,

उसे रहबर ही तोड दे कोई मलाल नहीं मुझे।

हार है या जीत ये मंजिल बतायेगी,

मैं रास्ते में रहा कोई मलाल नहीं मुझे।

खेलने के दिनों इतना बडा हो गया,

बचपन कहां गया कोई मलाल नहीं मुझे।

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