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जमाने भर की कौन दुहाई दे

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर March 2, 2022
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लव अब तक खोले ही नहीं तुमने,

फिर कैसे मुझे तुम्हारी आवाज सुनाई दे ।

मिलना तो दूर है देखा ही नहीं तुम्हें,

और कहते हो मुझे विदाई दे।

जमाने भर की कौन दुहाई दे,

गर नहीं है ऐतबार तो मुझे रिहाई दे।

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