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एक पल में एक सदी की सजा, हमसे पूछिए।

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर January 20, 2023
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एक पल में एक सदी की सजा,

हमसे पूछिए।

भूले नही है आज तक उन्हें हम,

पल पल का हिसाब,

हमसे पूछिए।

अंजाम आशिकी का आप जानिए,

इजहारे मोहब्बत की सजा,

हमसे पूछिए।

यार रोशनी का मजा आप जानिए,

अपने ही चिरागो से जो घर जले उसकी सजा,

हमसे पूछिए।

वो जान ही न पाये हमें उनसे प्यार है,

आंखो के मुखविरौं का धोखा,

हमसे पूछिए।

हंसने का सौक न था आपकी तरह,

हंसिये मगर हसी की सजा,

हमसे पूछिए।

तुम्हे भूलना सके उम्र भर हम,

भुलाने की कोशिशों की सजा,

हमसे पूछिए।

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