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दोनों ने मिलकर वादे किये, मुझे याद रहे तुम भूल गये।

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर August 28, 2021
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दोनों ने मिलकर वादे किये,

मुझे याद रहे तुम भूल गये।

लवो पे हमेशा तुम्हारा ही नाम रहा,

हम तुम्हारे ही रहे तुम गैर के हो गये ।

वो कॉलेज का जमाना भुलाए नहीं भूलता है मुझे,

आखरी बार मिलने का वादा किया,तुम फिर से देर करते गये।

तेरे वादो पे यकी के अलावा और क्या था मेरे वस मै,

इक बेवस को तन्हा ऐसे ही छोड गये।

मैंने हस हसकर सहे तुम्हारे सितम,

वादे पे वादे और तोड़ते रहे तुम कसम,

न कसमे न वादे टूटे हमसे,तुम मेरे दिल के टुकडे कर गये।

जमाना तुम्हें चाहता हो भले,

हम सा दिवाना तुम्हें जहाँ मै ना मिले,

ठोकरें खाकर तुम्हारे ही रहे,तुम देखकर भी अनजान होते गये।

सपने सुहाने देखे थे हमने,

रात भर जागकर बुने थे हमने,

मैं जागता रहा और तुम सोते रह गये।

मेरे बाद कौन चाहेगा तुम्हे,

हमसे ज्यादा कौन प्यार करेगा तुम्हे,

हम तो हमेशा तुम्हे चाहते रहे,और तुम भुलाते गये 

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