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मेरी आहज़ारी भी तुमनें सुनी नहीं 

मेरी ख़्वाहिश कब तुमको सुनाई है।

ख़यालों में ग़ुरूब हुआ मेरे दिल का सूरज

मेरे तक़व्वुर ने मेरी ये हालत बनाई है।


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