सहरा's image
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सहरा नज़र आता है, समुन्दर सा है भरा जैसे
नाम तेरा आते ही, खिल उठता है चेहरा ऐसे
सदी बीत जाती है पर कहाँ हंसी आती है अब
तुम जाते पर, छोड़ गए थे खुशियों पर पहरा जैसे।
तुम इधर उधर से घूम टहल कर लौट के वापस आओगे
है यकीं अभी तक सनम, इश्क़ हो इतना गहरा जैसे।
हर रोज़ मुझे है लगता जैसे आज अमावस फिर से है
पर आज अमावस होती तो, हो शहर ये ज़हरा कैसे।
उफ़्तादगी में हमने अपना ही घर जला डाला
अल्फ़ात है ये उनकी, वरना शहर में हो ढिंढोरा कैसे।
अब तक नहीं कुछ बात की, न नाम तेरा है लिया
फिर बस्ती में, अपनी आशिक़ी का हुआ है शोहरा कैसे।
हर धड़कन से धीरे धीरे नाम तुम्हारा बहता है
क्या लगता है सागर ही है? भरा है जो सहरा ऐसे।
~विचार_प्रत्यक्ष

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