मादूम पल's image
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बड़े तक्सीम हैं ये ख़्वाब कभी इनको इकट्ठा कर
किसी मादूम से पल में कभी तू भी तो आया कर।
ज़रा जन्नत से कह दो दूर बैठे शोर न मचाया कर
मैं ख़ुद ही चला आऊंगा कभी दिल से बुलाया कर।
उन्हें मिलकर कहूँ बातें तो शायद वो समझ पाते
वो हमसे रोज़ कहते हैं कभी मिलने बुलाया कर।
अभी कल ही तो देखा था उन्हें कल ही से ओझल हैं
कल ही कहा हमनें के ख्वाबों में तो आया कर।
बड़ा दिलकश नज़ारा था के जब वो हमारा था
हमारे साथ ही तो कल तलक हर एक तारा था
कभी से जागता हूँ मैं और तारे सुलाता हूँ
मुझे परेशां ही करने को सितारे ना जगाया कर।
फ़लक़ में चाँद भी ओढ़े हुए बादल की चादर है
क़भी ख़ुद तू ही मुखड़े से तेरी ज़ुल्फ़ें हटाया कर।
अभी नादान हैं तू ख़ुद या हमको समझता है
इश्क़ कहते किसे हैं, तू नहीं हमको सिखाया कर।
तेरी क़ुर्बत में था तो वस्ल ये, ख़ुद से भी प्यारा था
कहा है चाँद मग़र हर दिन अमावस न मनाया कर।
तेरा आना तहय्युर था मेरे दिल के मोहल्ले में
किसी मादूम से पल में कभी फिर से तू आया कर।
~विचार_प्रत्यक्ष

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