हबीब's image
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रुक्सत-ए-हबीब मैं कैसे सहूँ

दर्द-ए-दिल अब मैं किससे कहूँ

मुनासिब नहीं घूमूँ राहों में

ख़ुदा करम काश मैं पाबंद रहूँ।

~विचार_प्रत्यक्ष



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