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विश्व हिंदी दिवस

Pratimaa SrivastavaPratimaa Srivastava January 10, 2022
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हिंदी से मेरा प्रेम
अपरिभाषित है,
वह हर चीज जिसको
हम परिभाषित नहीं कर पाते,
वह हमारे भीतर
अतिश्योक्ति में होता है।
अतिश्योक्ति में सिर्फ
प्रेम किया जा सकता है।
मातृभाषा और मातृभूमि का
प्रेम अवर्णनीय है!
इसे शब्दों की सीमाओं में
बांधा नहीं जा सकता।
नवजात शिशु का प्रथम
शब्द म' म' 'म से शुरू हो
माँ ,माई, मम्मा अथवा मॉम
तक हिंदी के 'म' वर्ण
द्वारा ही पहुँचता है।
हिंदी से व्यक्ति का सम्बंध
व्यवहारात्मक से ज्यादा
भावनात्मक है!
शायद इसलिए ही हमारी
सारी कल्पनाएं
हिंदी में ही होती हैं।
तब किसी अन्य भाषा
का स्थान ही नहीं होता
मस्तिष्क में।
हिंदी भाषा है
मन- मस्तिष्क के
सम्बन्धों की,अनुबन्धों की!
ह्रदयांचल में अंकुरित
प्रथम शब्दों के अंकों की।

~ प्रतिमा श्रीवास्तव

#विश्व_हिंदी_दिवस_की_शुभकामनाएं

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