आभूषण's image
प्रेम से गुजरे बिना ही प्रेम को गुनहगार करार कर देना, अपरिपक्वता का पर्याय है।
जिससे तुम मिले नहीं,
जिसकी आँखों में तुमने
सुख दुःख के भाव देखे नहीं,
जिसके अतीत और वर्तमान के संघर्षों का सच तुम्हें पता नहीं,
उसके लिए कोई अवधारणा बना लेना ,
और निरन्तर उसी पर अड़े रहना,
तुम्हारी श्रेष्ठता नहीं
चहलता मात्र है ।
जीवन औऱ जीवित प्राणियों को देखने का तुम्हारा जितना विस्तृत दृष्टिकोण होगा ,
जीवन को तुम उतने ही करीब से देख पाओगे ।
सम्बन्धों का धन सिर्फ उसके पास है, जिसने भावनाओं के धन को संचित किया है बरसों बरस।
जीवन पानी का बुलबुला मात्र है जो कब सागर में समाहित हो जाए कोई नहीं जानता। नश्वर शरीर और उस पर सजे आभूषण  पर अभिमान करने वाले भूल जाते हैं कि उनके बाद और उनके होते हुए सिर्फ उनके शब्द याद रख्खे जाएंगे वो स्नेही हों या अस्नेही।
वो मधुर हों या कटु। वह सुंदर हों या असुंदर ।
वह सुख की वर्षा कर मन को आनन्दित करते हों,
या दुःख और क्षोभ के भाव उकेर कर मन को दुःखित।

~प्रतिमा श्रीवास्तव
१४ /०२/२०२२

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts