तथाकथित समाज और उसका न्याय ।'s image
Poetry2 min read

तथाकथित समाज और उसका न्याय ।

Pratima PandeyPratima Pandey September 26, 2021
Share0 Bookmarks 19 Reads0 Likes


यदि बेटियां उड़कर आकाश छूना चाहें ,

तो ये समाज उनके पर कुतर देता है ।


बेटियां घर छोड़कर अपने सपनों के पीछे चली जाएं ,

तो ये समाज उन्हें बदचलन की पदवी देता है ।


बेटियां अपने साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं ,

तो ये समाज उनकी आवाज दबाने के सारे जतन करता है ।


बेटियां अगर अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुने ,

तो ये समाज उनका जीना मुश्किल कर देता है ।



इसके विपरित जब बेटियां कोख में मार दी जाती है ,

तब यही समाज जाने क्यों गूंगा बन जाता है ।


जब किसी पिता को उसकी बेटी की शादी में दहेज देने के लिए कर्ज लेना पड़ता है ,

तब यही समाज जाने क्यों चैन कि नींद सो रहा होता है ।


जब किसी की बेटी को उसके ससुराल से सिर्फ इसलिए निकाला जाता है क्यूंकि उसके पिता दहेज नहीं दे सके ,

तब यही समाज जाने क्यों अपनी आंखें बंद कर लेता है ।


इसी दोगले समाज के साथ चलने के लिए हम लड़कियों को बचपन से सिखाया जाता है । आखिर क्यों...?

जो समाज न्याय का मतलब ही नहीं जानता वही न्यायाधीश बना बैठा है ।


- प्रतिमा पांडेय


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts