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भली लड़की उर्फ संस्कारी लड़की ।

Pratima PandeyPratima Pandey November 9, 2021
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// भली लड़की उर्फ संस्कारी लड़की //


तुम गलत को गलत नहीं कहती ।

अरे ! बल्कि तुम तो कुछ कहती ही नहीं ,

बस सुनती रहती हो चुप चाप सबकी कही..।

तुम्हारी जुबान पर तुमने ताला लगा रखा है,

अपनी ख्वाहिशें तुमने औरों की ख्वाहिशों तले दबा रखी हैं ।

तुम खुद से पहले औरों को चुनती हो.. ।

समाज की खींची लक्ष्मण रेखा के बाहर

कभी पांव नहीं रखती हो, तुम इतनी भली लड़की हो.. ।

दर्द होता है कभी तो रोती नहीं सुबकती हो अकेले में ,

इतनी साहसी हो तुम किसी से अपना दुख नहीं कहती .. ।

तुम्हारे जिंदगी के फैसले कोई और लेता है और तुम एक भी सवाल नहीं करती.. ।

हां ! भली लड़की, तुम कोई बवाल नहीं करती ।

तुम्हारी अपनी मर्ज़ी खुद तुमने कभी नहीं चाही.. ।

 यूं हाड़ , मांस का पुतला बने रहना तुम्हें अच्छा नहीं लगता ,

फिर भी तुम रहती हो क्यों की तुम भली हो ।

समाज कहता है तुम संस्कारी लड़की हो ।


ओ! भली लड़की, बहुत प्रसन्न है तुम से समाज.. 

तुम प्रसन्न हो या नहीं..?

शायद तुम से किया गया मेरा ये सवाल ही गलत है ।

क्योंकि भली लड़की उर्फ संस्कारी लड़की

की खुशी तो समाज के अनुसार समाज की खुशी में ही निहित होती है ।


~प्रतिमा पांडेय

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