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कौन हूं मैं??

Pratiksha SoniPratiksha Soni April 30, 2022
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मैं हूं कौन और क्या हूं मैं यह राज था अब तक राज रहा
मेरे जीवन में हर पल हर क्षण नई आफत का आगाज रहा

लोगों ने मुझको बिन मांगे खूब प्यार दिया सत्कार दिया
फिर ना जाने क्यों सब ने मुझको कुत्तों की तरह दुत्कार दिया
अफसोस नहीं उन लोगों का जिन्होंने मुझमें बदलाव किया
मुझे बांट दिया टुकड़ों में और मेरा मुझमें अलगाव किया

अब चीख रहे है वो सब मुझमें बन के परछाई काल सी
मैं लड़ रही हूं खड़ी अकेली खुद में खुद की ढाल सी

उन्हें पता नहीं मैं आदि हूं और मैं ही सब का अंत हूं
मैं व्यापत प्रतीक्षा हर जगह मैं सर्वथा अनंत हूं

फिर क्यों मैं टूटी हूं इतना और क्यों मैं इतनी खिन्न हूं,,
क्यू उलझी हूं खुद में इतना,, क्यूं मैं इतनी भिन्न हूं।।

मैं थी तितली और थी बगिया और थी पृथ्वी पे लताओं सी
अब बनी बैठी हूं खुद के लिए जंजीर सी बाधाओं सी।।

बस बहुत हुआ अब इस नश्वर शरीर का हरण चाहिए,,
मैं थक गई,, बिखर गई,, मुझे अब मरण चाहिए।।।।

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