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दो फूल बगिया के

Prateek JainPrateek Jain February 19, 2022
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दो फूल बगिया के,
माली के पीछे से
हल्के से मुस्काए
एक जरा कड़क उनमें से
दुसरा जरा शर्माये
भिन्न रंग की पंखुड़ियां थी
भिन्न रंग की भुजाएं
लगने लगे एक रंग के
वो जब जब आंख मिलाए
दूर झरोखे से कवि देखे
वो देख के ये मुस्काए
बगिया में थे फूल कई
पर दो ही क्यों महकाए

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