बयान's image
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घर के एक कोने में,
सुबकती हुई बच्ची की,
गुड़िया पर खून का एक धब्बा है,
लगता है गुड़िया भी खून के आंसू रोई है इस रात।

उसके गालों पर उंगलियों के निशान थे, 
जिन्हे आंसुओं की बूंदें भी छुपा न सकी।

पिछले महीने ही अब्बू ने ईद के तोहफे में नई फ्रॉक दिलाई थी,
फ्रॉक जो तन ढकने के लिए थी, उसकी क्या ज़रूरत आज रात...

हाथ और पैर दोनो एक दूसरे में इस कदर जकड़े हुए हैं,
मानो बदन कतराता हो एक इंच भी खुलने से अब....

सवेरे अम्मी ने चोटी करके भेजा था,
अब सारे बाल खुले हुए हैं,
कि एक एक रेशे ने ज्यादती को नंगी आंखों से देखा है।

पैंट अब पहन ली है उस आदमी ने और कहीं जाने लगा है,
रोशनी कम है थोड़ी कमरे में,
मगर,
अपनी जरूरतें पूरी कर लेते हैं हवलदार साहब

कल सवेरे आयेंगे हाथ में कागज़ का टुकड़ा और एक कलम लेकर,
सुनने मुझसे मेरी दास्तां,
आखिर,
बयान भी तो जरूरी है लडकी का,

पर.....
मैं तो बचपन से बेजुबान हूं।

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