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बेख़ुदी की ख़ुश्क राहों से मुझे

prasoonprasoon March 28, 2022
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बेख़ुदी की ख़ुश्क राहों से मुझे,
क्या शिकायत कज-कुलाहों से मुझे।

ऐ मिरे क़ातिल बरा-ए-इश्क़ अब,
आ बचा ले ख़ैर-ख़्वाहों से मुझे।

क्या मिला उल्फ़त पे ख़ुद को ख़र्च कर,
क्या मिला वादा निबाहों से मुझे।

रफ़्ता रफ़्ता अब घुटन होने लगी,
ज़िन्दगी तेरी पनाहों से मुझे।

बन्दगी की जग्ह है कू-ए-बुताँ,
वास्ता क्या ख़ानक़ाहों से मुझे।

डर नहीं लगता है तेरे हिज़्र से,
डर मगर लगता है आहों से मुझे।

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