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मै कविताओं को जीवित रखता हूँ!

@lko_pranay@lko_pranay May 11, 2022
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कि जनेश्वर पार्क रौनक तो इमामबाड़ा है शान यहाँ की

हम ईद मे मिलते गले और भंडारे मे साथ भोजन करें।

ये विविध संस्कृति, परम्परा मै यहीं देखा करता हूँ

कहीं और नहीं, मै नवाबों के शहर से ताल्लुक रखता हूँ।

मै कविताओं को जीवित रखता हूँ।। 


समय के साथ परिवर्तन निश्चित पर इन पीढ़ी मे वो बात नही

शिक्षा है प्राप्त इन्हें लकिन लहज़ा और संस्कार नही।

इस चकाचौंध में मै शहर की तहज़ीब को विलुप्त होते देखता हूँ

छोटे भी मुझसे बनाये दूरी जब शिष्टाचार की बात करता हूँ।

मै कविताओं को जीवित रखता हूँ।। 


पहले ही कमरे मे बात बंद थी, अब डिजिटल हुआ ज़माना है

नशा करना कूल समझते, इन्हें अश्लील बातें कौन सिखाता है।

होता मुझे अफ़सोस इसलिए अपने आप से प्रश्न करता हूँ 

बचपन न खो दें कहीं ध्यान रखिये, आज आपसे विनती करता हूँ।

मै कविताओं को जीवित रखता हूँ।। 


है हिन्दी जब मातृ भाषा फिर क्यूँ दूरी बानाते हो

अंग्रेजी मे अपशब्द कह सकते और हिन्दी बोलने में शर्माते हो।

युवा पीढ़ी मै रगों मे बहती हिन्दी वर्णमाला जपता हूँ 

बुरे लगे मेरे शब्द तुमको क्युंकि मै दिल पे चोट देता हूँ।

मै कविताओं को जीवित रखता हूँ।। 


शोर मचा ले जितना तू, कवितायें लिखना कोई काम नही

मशूरियत के लिए नही करता मै, ये नेटफ़्लिक्स की दुकान नही।

समय लागाया, कॉपी घिस दी, हासिल हुआ मुकाम नही

चार लोग मेरे सुनने वाले और चाहिए मुझे पहचान नही।।


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