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चिरयुवा समय, यह नहीं बीत रहा,

वह तो धीरे-धीरे पग आगे बढ़ा रहा।

समय के साथ नहीं चल पा रहे,

क्रमशः हम बीत रहे हैं।

रीता हाथ आए थे, रीता हाथ जाएंगे ,

कुछ निशाँ ,बीती जिंदगी के जरूर छोड़ जाएँगे।



नहीं याद रखेगी धरती,

हम कैसे दिखते थे।

इबारतें लिखी और याद करी जाएंगी,

हमारे सद्कर्मों की, जो धरती को गदगद करेंगे।

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