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एक छोटी सी ख्वाइश

Prakriti AgrawalPrakriti Agrawal February 17, 2022
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ख्वाहिशों का समुंदर नहीं ,बस एक छोटी सी ख्वाइश है,

कभी साथ मेरे बैठो, खुद को भुला दूं मैं ,उन फुर्सत के पलों में ,

मैं नहीं चाहती तुम अपना कीमती वक्त मेरे ऊपर व्यर्थ करो पर मेरे कुछ तन्हा पलों की खामोशी का संवाद बनो।

चाह नहीं कि तुम मेरी सुंदरता पर रिझो,

क्योंकि यह क्षणिक तो खो जाएगी,

पर मेरे अंतर्मन की गहराई में उतरो,

उसे उजियारे से भर दो।

ख्वाहिश है मुझे प्रेम वश आलिंगन में भरो ,

महसूस कर सकूं मैं प्रेम का मनुहार करती धड़कनों को ,

सुन सको तुम भी मेरे मन की आवाज को,

जो बहुत कुछ तुमसे बयां करना चाहती हैं।

ख्वाइश नहीं मेरे लिए तुम दुनिया से मुंह मोड़ लो,

पर मुझे भी अपनी दुनिया में शामिल कर लो ,

कुछ पंक्तियां अपनी जिंदगी की किताब में

मेरे नाम भी लिख दो।

बैठो तुम मेरे साथ एक सच्चे पुरुष बनकर,

वरण करो मुझे अपना आधा अंग समझकर ,

जिंदगी का इतना सफर तय किया हमने

क्या सच मायने में साथ चले हम, हमसफर मेरे

तेरे कदमों के निशान पर तेरे पीछे हम चलते रहे ,

ख्वाहिश है अब यह निशान साथ बनें।

एक हिम शैल सा यह मन हो उठा है ,

बेचैन है इस प्यार की तपिश के लिए ।

विश्वास करो जिस दिन यह बर्फ पिघलेगी,

आंखों से सैलाब बहेगा,पर बहाव नही

जिंदगी में मेरी ठहराव आएगा,

वह धूप खिलेगी जो मेरे मन को ही नहीं

हे प्रिय ,तुम्हारे मन को भी उजाले से भर देगी।



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