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त्रेतायुग-श्री राम का

Pragya SinghPragya Singh October 15, 2021
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त्रेतायुग - श्री राम का 


त्रेतायुग श्री राम के अवतरण से धन्य हुआ, 

धन्य हुई वसुधा,धन्य हुआ ये मानवलोक,

दर्शन पाकर पार हुई जीवन की नैया, 

किया कल्याण असंख्य का तृप्त हुई तृष्णा भक्तों की, 

सत्य, धर्म ,सदाचार से पोषित हुआ त्रेतायुग श्री राम का!

सत्य सनातन धर्म का भगवा परिचायक हुआ, 

राम राज्य में सब खुश, सब संतुष्ट हुए, 

हुई भक्तिभाव और राष्ट्रप्रेम समाहित हर जन के मन में, 

हुआ अधर्म का नाश मर्यादा पुरुषोत्तम के श्री हाथो से, 

उद्धार हुआ अधर्मी का भी प्राप्त हुई शरण जिन्हें श्री राम के द्वारा,

अवतरण एक लीला थी, सिखाना था सबको धर्म का पाठ, 

हुए बड़े ज्ञानी, ओजस्वी अपार किन्तु वही हुआ स्वीकार, 

जिसने धारण किया धर्म का द्वार,

रावण महा ज्ञानी, प्रकांड ओजस्वी प्राणी,

वेदों का ज्ञाता शिव का भक्त सोचे तीनों लोकों का स्वामी, 

दंड मिला अधर्म का निज पाप का किए हुए अत्याचार का, 

दशहरा प्रतीक हैं!

धर्म की जीत का, अधर्म की पराजय का, 

सत्य के विश्वास का असत्य के अत्याचार का, 

बुराईयों की राख का अच्छाइयों के खुशी का, 

यह दिवस सिखाता चलते रहो धर्म की राह पर, 

कुछ अंश तो ग्रहण करो श्री राम के विशाल व्यक्तित्व का, 

चलो बनाये इस कलयुग को त्रेतायुग श्री राम का, 

जहाँ हो राम राज्य, सजे हर द्वार राम दरबार ,

उजियारा हो धर्म के दीपक का, सम्मान हो हर प्राणी का, 

नाश कर खुद के भीतर उस अधर्मी का,

उद्घोष करो, शंख से गुंजायमान करो वातावरण को, 

कि त्रेतायुग पुनः आएगा!

मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन से सीख कर, 

हर जन श्री राम जैसा बन पाएगा,

त्रेतायुग पुनः आएगा•


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