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प्रिय तुम समुद्र हो

Pragya ShuklaPragya Shukla November 10, 2022
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प्रिय!


तुम समुद्र हो जो अपनी गहराई से इतर

अपने खारेपन की तरफ ही

ध्यान आकृष्ट कराते हो..


जबकि मैं नदी

जिसकी नियति ही 

समुद्र में मिल जाना है..



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