हजारों लोग हैं अपने's image
Poetry1 min read

हजारों लोग हैं अपने

Pragya ShuklaPragya Shukla June 3, 2022
Share0 Bookmarks 31 Reads1 Likes

यूँ तो कहने को हजारों लोग हैं अपने

मगर सब अपने अपने तन्हाई में गुमसुम है।



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts