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प्रगतिशील स्त्री

Pragya ShuklaPragya Shukla March 8, 2022
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प्रगतिशील स्त्री!

हाँ वही जो पीसती थी

अपने सपनों को समाज की चक्की में,

आज अनेकों उद्योगों की मालकिन है।


प्रगतिशील स्त्री!

हाँ वही अन्याय सहना जिसकी

नियति बन चुकी थी

आज स्वयं न्याय सिहांसन पर आसीन है।


प्रगतिशील स्त्री!

हाँ वही जो तरसती थी,

पाठशाला में जाने को

आज स्वयं शिक्षिका है।


प्रगतिशील स्त्री!

हाँ वही जो अपनी भावनाओं को,

कहने से कतराती थी,

आज स्वयं लेखिका है।


राग अनुराग की बात करूँ तो,

वही प्रेयसी और प्रियतमा भी है

जिसकी प्राथमिकता प्रेम ही है

सबसे अनोखी बात सृष्टि का आधार है।


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