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"तेरे मेरे युग की गाथा बरसों गुमसुम नयन भिगोना"

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल January 21, 2022
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"चाहा प्रीत प्रीत हो जाऊँ"


भीतर बसता एक खिलौना

जितना देखा उतना बौना,


चाहा प्रीत प्रीत हो जाऊँ

मेरापन तेरापन खोना,


मेरे तेरे युग की गाथा

बरसों गुमसुम नयन भिगोना,


होठों पर एक नाम विराजा

गमलों में यादों को बोना,


मोती सीपी शंख सजाए

‘उसके तट का’ मन में होना,


रात की रानी कमल सुबह का

पल-पल कल की महक संजोना।


--प्रदीप सेठ सलिल


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