"कोई चिन्ह शेष नही है अब.....मेरी हथेलियों पर"'s image
Love PoetryPoetry1 min read

"कोई चिन्ह शेष नही है अब.....मेरी हथेलियों पर"

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल October 19, 2021
Share1 Bookmarks 35 Reads1 Likes

"आकाश पर से बादल छटेंगें"


कोई चिन्ह शेष नही है अब

मेरी हथेलियों पर

फिर भी

मैं निराश तो नही

विश्वास है मुझे

कि भाग्य रेखा उभरेगी

मेरे हाथों पर,

और संपूर्ण वातावरण

परिवर्तित हो जाएगा

ख़ुशहाली के निमित्त,

ऋतु

संदेश देगी

दिशाओं में,

आकाश पर से बादल छटेंगें,

प्रकाश

मद्धम मद्धम पहुंचेगा

पृथ्वी पर हर ओर

उजियारा

निश्चय लिए ढूंढेगा

कोई तिमिर बिन्दु

और वह नही होगा।


--प्रदीप सेठ सलिल

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts