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"इस अकेले द्वीप में बस दिल अकेला जल रहा...."

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल October 15, 2021
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'एक झंकृत स्वर सरीखा था उमर का सिलसिला'



ज़िंदगी को आपके जबसे मुकाबिल कर दिया,

दर्द की चौपाल पे एक नाम शामिल कर दिया।


इस अकेले द्वीप में बस दिल अकेला जल रहा,

तुमने देखो दोस्त इसको कितना काबिल कर दिया।


एक झंकृत स्वर सरीखा था उमर का सिलसिला

वक़्त की लहरों ने सूना एक साहिल कर दिया।


मैं हवाओं की तरह गुलशन में बिखरा हर तरफ़,

हर कलि हर फूल हर मंज़र को नमदिल कर दिया।


यूं तो हर आँसू मेरा बस दर्द का मेहमान था,

आपने शबनम को अफ़साने में शामिल कर दिया।

--प्रदीप सेठ “सलिल”


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