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'गूंज कॉलेज के कोरिडोर की...कुछ ऐसे भी'

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल July 21, 2022
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"गूंंज-कॉलेज के कोरिडोर की.....कुछ ऐसे भी"



तेरे होने की वज़ह दिल में मुझे न मालूम

पर ये जानूं के कभी तुझसे मैं बावस्ता था।

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मेरे सदके जो तुझे दिल में बैठा रखा है,

मैने ग़ैरों को भी इज्ज़त से नवाज़ा हरदम।

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मेरे ख़्वाबों में कोई और भी आए कैसे,

तेरा कब्जा तेरा आँगन तेरा सरमाया है।

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मैने झांका जो किसी खिड़की किसी चौखट से,

मुझको ख़्वाबों में बसी चिड़िया नज़र आयी है।

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दिल को ये बात गंवारा भले कैसे होगी,

वो धड़कता भी रहे और न हो तू उसमे।


---प्रदीप सेठ सलिल.

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