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'चुनाव की बरसात में तटबंध तोड़कर....'

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल November 8, 2022
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"आवाम से मनुष्य सा व्यवहार कीजिए "

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चुनाव की बरसात में तटबंध तोड़कर,

कौन किस जगह गया विचार कीजिए,

आप जंगल में खड़े हैं या नगर के मध्य

आवाम से मनुष्य सा व्यवहार कीजिए।

×××××

×××××

मेरे शबिस्ताँ को भी ये ऐहसास हो गया,

धुआँ उठा ज़मी पे फ़लक स्याह हो गया।

क्या ग़जब करिश्मा सियासत है नाज़िरीन

हर शख़्स इसकी हद् में बेगुनाह हो गया।


--प्रदीप सेठ सलिल 

*शबिस्ताँ=शयनागार

*नाज़िरीन=दर्शकगण/पढ़ने वाले लोग

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