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"बूंद बूंद हो मोम पिघलता....."

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल April 17, 2022
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'क्यारी क्यारी बोए रिश्ते'



सूरज सा कमरे में ढलता

सूखे संबंधों में पलता,


किरण किरण जोड़ी जीवन भर

अंत समय काजल में पलता,


दिया सजाया उजियारे का

बूंद बूंद हो मोम पिघलता,


क्यारी क्यारी बोए रिश्ते

बिरवा नागफ़नी का फलता,


शहर तुम्हारा शहर हमारा

निर्मम चुप्पी सुगम निगलता।


--प्रदीप सेठ सलिल


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