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नारी तुम हो मेरे जैसी

Prachita NandiniPrachita Nandini December 5, 2021
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नारी तुम हो मेरे जैसी,

और मैं तेरी प्रतिरूप हूँ,

तुम चंचल चपल इठलाती लहर सी,

मैं श्वेत शांत समुंद्र हूँ,

तुम काली तो मैं दुर्गा,

तुम चंडी तो मैं ज्वाला,

तुम देवी हो, मैं देवी हूँ,

संज्ञा भिन्न अर्थ एक है

बस कुछ शब्दों की ये माया।

विषपान शिव ने प्रथम किया,

पर विद्वेष संग हमने सहा

इतिहास शाक्षी, वर्तमान कठिन

और भविष्य में संघर्ष अधिक है,

तब तुम अहल्या तो मैं लक्ष्मी,

कभी तुम नायकी और मैं पद्मिनी बन जायेंगे 

ख्याति अलग पर युद्ध एक है,

रुढ़िवादियों का ये संसार कठुर है।

नारी मैं हूँ तेरे जैसी और तू मेरा प्रतिबिंब है।

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