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हर शब्द यहाँ झूठा है

prabhat parimalprabhat parimal December 4, 2021
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किस सोच में डूबा रहता है

जीवन से ऊबा रहता है


क्या आशाओं ने लूटा है

या नियति तुझसे रूठा है


सांत्वना में सुख मत ढूंढ यहाँ

हर शब्द यहाँ पर झूठा है


सुख का हर पल सीमित है

मृत निश्चित है जो जीवित है

स्वयं को अलग मत जान यहाँ

हर जीवन यहाँ पर पीड़ित है

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