ज़िम्मेदार's image
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तेरी तकलीफ में मैं अब सलाहकार नहीं हूं,
कैसे समझाऊं की अब मैं तेरा प्यार नही हूं,
फिजूल परेशान करती है तू मुझे अकसर,
तेरी जिंदगी का अब मैं जिम्मेदार नहीं हूं

अब तू रूठती है तो तकलीफ नहीं होती,
तुझे समझाना तुजसे दूरी कर लेना है,
मैं नहीं चाहता कि कमजोर बने तू,
तुझे गिर कर फिर उठने देना है

जिंदगी जज्बात नही है व्यवहारिक बन,
दोगली महसूस होती है ये बातें तेरी मुझे,
तेरी गलती नही है इसमें कोई,
जानती हूं मेरी इज्जत ही गिर चुकी मुझसे

तू जाता है ये जान कर की ये वापस तो आयेगी,
इसकी आत्मग्लानि ही फिर से इसे खायेगी,
काश मैं कभी इतनी हिम्मत कर पाऊं,
तड़प लू तुझे याद कर, पर वापस तेरे दर न आऊं

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