वो तुम हो's image
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बहुत सोचा है तुम्हे, यूं लगता है की जीवन भर यूं ही सोचेंगे
सोचेंगे की क्या ही ले गए तुम मुझसे ऐसा,
जो इतने लंबे अंतराल में भी हम भर ना पाए,
सोचेंगे कि कहां वो कौन सी कमी है,
जो हर पल दिल का दरवाजा खटखटा कर अधूरेपन का एहसास कराती है,
सुनेंगी उन अनकही आवाजों को एहसासों को,
जो आज भी मेरे कानो में झंकार बन गूंजती है,
जो रात के अंधेरे में मुझे झकझोर कर जगा जाती है,
समझेंगे उन जज्बातों को जो हर पल,
मेरी हार का मुझे एहसास कराते है,
पल, घंटे, दिन, महीने, साल, दशक,
वो वक्त कौन सा होगा जब नही होगा तू,
जानना चाहती हूं तू आखिर मुझ में छुपा कहां है,
ताकि निकाल कही घर के किसी कोने में दुबका दूं,
भूलना चाहती हू तेरे चेहरे को जिसे चाह कर भी भूल नही पाती हूं,
तुझे हर बार बताना चाहती हूं कि तुझे भूलने में मैंने हार मान ली है,
कुछ है जो मेरे बस से परे है,
और वो कुछ तुम हो।

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