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सुशील कुमार

PoonamPoonam November 11, 2022
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एक जुनून उस चेहरे से बोलता था,
उसके कदमों से दंगल डोलता था,
देख उसे कांप उठते प्रतिद्वंदी,
जब रिंग में हल्ला बोलता था

हुनर तुम सा दूर दूर तक न था,
पहवानो में ऐसा गुरुर तक न था,
अनजान थे सब इस खेल से अक्सर
कुश्ती का लोगो में सुरूर तक न था,

प्रेरणा के स्रोत का प्रमाण दिया,
भारत का विश्व में नाम किया,
हर बार विजयपताका लहरा तुमने,
इस खेल को नया मुकाम दिया

कौन सा मेडल ना तुमने लिया,
ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, सब बाधाओं को पार किया,
अर्जुन अवार्ड,पद्मा श्री से नवाजे गए,
अलग ही श्रेणी में तुम विराजे गए

नव युवाओं को तुमने नई राह दी,
जिंदगी रूतबे से जीने की सलाह दी,
मार्ग दिखा अन्य खिलाडियों को तुमने,
उनके सपनो को एक नई चाह दी 

आपको शत शत नमन जो आपने किया,
पर अंततः क्यों पल में सब गवा दिया,
एक रार में सब खो कर तुमने,
खुद को क्यों नजरो से गिरा दिया

अहम हुआ था सर पर सवार,
या प्रकृति का हुआ तुम पर प्रहार,
अपना वर्चस्व को क्षण भर में क्यूं,
यूं फिजूल मिट्टी में ही मिला दिया

इंडिया को अभी कई बार जीतना था,
अनेकों बार अभी राष्ट्रगान होना था,
क्यूं बिना भाग लिए ही बाहर जा निकले,
अभी तो धरती पर तुम्हारा गुणगान होना था

अंत मैं करती हूं सबसे बस यही इल्तिज़ा,
ओ युवा वर्ग मैं में, खुद को ना खो देना,
नाम करो इस देश का जग में जी भर के,
अपनो को खुद से दूर नहीं रोने देना

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