सीरत's image
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गमगीन से तुम,मायूस से हम,
पर कहने को अब रहा क्या है,
फिजाओं में कयूं तेरे लफ्ज़ हैं बहते,
सीखा दो हमें भी ये अदा क्या है

रेत से बिखरते वक्त को सोच,
दुश्मनी का हमसे सिलसिला क्या है?
मोहब्बत के लम्हों में जिंदगी है जिंदा,
बता जीवन में अब और बचा क्या है

प्यार मुक्कमल हो जाने का क्या मज़ा, 
मिल जाए चांद तो चांद कहां रहता है,
दूर है तभी तक तू चाहत में तेरी,
पास रह कर चाहने में मज़ा क्या है

सागर पे बिछौना बिछा दिया हमने,
लहरों संग बहने से अब गिला क्या है,
सूरत पर मरती है अक्सर जवानी,
सीरत की चाहत का अब काफिला कहां है?

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