सम्मान's image
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मेहबूब न रहे वो अब दिल ओ जान न रहे,
कया कीजिए जब आपस में सम्मान न रहे,
क्या कहिए जब जान के भी पहचान न रहे,
मुझ में तुझे पाने के अब अरमान न रहे

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