रोष's image
Share0 Bookmarks 75 Reads0 Likes
खफा लोगो को ये रातें, नही क्यो रास आती है,
ख्वाबों में उन्हें चाहकर, हकीकत दर्द पाती है,
वफा तू खुद से भी तो रख खुदा के नाम पर बंदया,
जो हस्ते है ये किस्मत भी, उन्ही पर खिलखिलाती है

बता तू रोष क्यूं रखे जहां के खास लोगो से,
हिसाबो सी मोहब्बत ही उन्हें अब समझ आती है,
हम तो आम बनने में मुक्कमल खुद को पाते है,
बदलते मौसम सी चाहत, हमें बिलकुल न भाती है

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts