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चलो अपनी हर नज्म का नाम तुम्हे दे दे,
क्या याद करोगे प्यार का तुम्हे ये इनाम दे दे,
तुम्हे मिलेंगे जमाने में चाहने वाले बहुत,
तुझे हमें चाहने का थोड़ा सा गुमान दे दे

जब कतरा कतरा पाओगे तुम खुद को मेरी नज्मों में,
पढ़ कर के आंसू छलकेंगे टीस उठेगी जख्मों में,
हम पल में तुम्हे हसाएंगे, पल भर में गुमसुम कर देंगे,
पल में थामेंगे हाथ तेरा,फिर खुद को ओझल कर देंगे

फिर तुम खुद में कुछ झाकोगे,अपने किए को आंकोंगे,
नफरत ओझल हो जाएगी दर्द का बदरी छाएगी,
उन लफ्जों को तुम बार बार मन में अपने दोहराओगे,
अब जितनी दूर मैं लगती हूं उतना करीब तब पाओगे

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