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प्रेम का कैदी

PoonamPoonam March 19, 2022
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ये मन आज भी तेरे प्रेम का कैदी है,
हां बरसो पहले की बात है वो मनहूस रात,
जब दर्द की चाबी से खूबसूरत रिश्तों का वो ताला खोल,
तूने मुझे हाथ पकड़ विदा कर दिया था,
ना लौट आने की हजारों कसमों में बांध कर,
भावनाओ की गठरी को दिल के समुंदर में दफन कर दिया था,

किंतु,मैं चाह कर भी कोने में पड़ा वो भारी मन ना उठा पाई,
वास्तव में मेरा मन तेरे दिल को एक धमनी से जुड़ गया था,
और दोनो में एक से रक्त का संचार होने लगा था,
मैं किसी अनहोनी के चलते उसे अपने संग ना ले जा पाई

संभवत, आज भी मैं वही चुभन, दर्द, कुलबुलाहट, ईर्ष्या उसी तरह महसूस करती हूं,
आज भी तेरी आवाज नरमी, सांसे दवा,बातें सुकून, मौजूदगी प्रेम का एहसास कराती हैं,
यूं तो मानव अधिकारों के चलते किसी को कैद रखना गुनाह है,
परंतु यहां तो कैदी ही कैद होना चाहता है, इसमें तेरा दोष है ही नही,

अब समाज के ठेकेदारों को कैसे समझाया जाए,
कि बात यहां मानव हित की नही जिजीविषा की है,
इस कैद में सुकून का एक छोटा सा घर बना लिया है मैने,
उस घर के बाहर खुद को असुरक्षित सा महसूस करती हूं,

अब उन दर्दों में, उनके इंतजार में ही खुद को जिंदा महसूस करती हूं,
कैसे कहें कि अब एक आजाद जिंदगी हमें रास नहीं आती..

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