कुर्बत's image
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बेजुबान गुफ्तगू, ब दस्तूर कुरबत,
नाकाफी से थे तेरी सोहबत के पल,
जो न था वो मेरी तकदीर में खुदाया,
क्यूं ही गए थे अपने मुक्कदर मिल

अज़ीज़ थे हमे दिल ओ जान से ज्यादा,
बेफिक्र नजर आते थे मेरे आज और कल,
नफरतों के वाक्यो ने मोडी है जिंदगी,
क्या फिर न कभी हम पाएंगे मिल?

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