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होली की रचनाएं

PoonamPoonam March 19, 2022
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तेरे हाथों से इन गालों पर लगा वो गुलाल,
अतीत के दृश्य पटल पर खींची सबसे खूबसूरत स्मृतियां है,
उस सुर्ख लाल रंग से बनी मेरी नियति की रेखाएं,
इस जीवन की सरलता को कितना जटिल कर गई है

उस स्पर्श ने इस पत्थर से जिस्म को कैसे मोम सा पिघला दिया था,
उन प्रेमामयी नजरों के तीरों से मेरी पलकें किस कदर झुक गई,
ओ कृष्ण ये पगली राधा तेरे उस स्पर्श, तेरी उन रचनाओं,
के एवज में अपना तन मन सब तुझे सौंप बैठी थी

परंतु तू तो छलिया निकला,उन रचनाओं से अपने हिस्से को होली निकाल,
तू अचानक अपने प्रेम को गागर लिए किसी और ही किनारे चल दिया,
अरे पगले वो रंग तूने मेरे चेहरे पर नही मेरे मन पर लगाया था,
अब तो होली का हर एक रंग मुझे फीका और फिजूल जान पड़ता है,

आज भी होली पर उन रंगों को देख मैं सिहर सी जाती हूं,
किसी कोने में आईने के सामने खड़ी गालों से तेरा वो रंग बार बार मिटाती हूं

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