बेफिक्री's image
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तेरे आलम की बेफिक्री भी अजीब थी,

तकलीफें कहां तब कभी मेरे करीब थी,

तू था साथ मेरे जब दिलबर,

मैं वाबस्ता कितनी खुशनसीब थी


तू बस गया था मुझमें कुछ ऐसे,

मेरी परछाई तक तेरी मुरीद थी,

तेरी रूह में बसती हूं आज भी कुछ ऐसे,

दुश्मनी जिंदगी से किसको ही अज़ीज़ थी

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