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इन ऊंची इमारतों के जानिब से जो हम गुजरे

काफिले यादों के नजरों के सामने से गुजरे।


तेरे शहर में होकर मिल न सके तुझसे

जब तक रहे दिन सारे इसी दर्द में गुजरे।


जिस तरफ देखा बस तुझे ही ढूंढा

है बेखबर किन गलियों किन रस्तों से गुजरे।


ये खुशबू सबा में लिपटी जो मुझे महका गई

मालूम होता है वो यहीं आस पास से है गुजरे।

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