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नानू ,पैसे और बचपन

pinki jhapinki jha March 21, 2022
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बचपन की एक बात बहुत साफ याद है,
नानाजी जब भी अपनी जेब से पैसे दिया करते,
कभी घर खर्च, कभी स्कूल की फीस या,
ऐसे ही बहुत से कामो के लिए ,
ये देख मेरी आँखे चमक उठती थी,
नानू किसी जादूगर से काम नहीं लगते थे उस वक्त,
फिर क्या था मैंने सोच लिया,
मुझे भी बड़े होकर ऐसा ही करना है,
उनके जैसा ही बनना है ,
कितना अच्छा होगा मैं दुकान जाउंगी,
चीज़े लुंगी खुद अपने मन जितना,
खुशिया बाटूंगी सबको जो चाहिए दिलाऊंगी,
और अपनी जेब से पैसे दूंगी,
सपना बहुत भला था,
मेरी नन्ही आँखों में जो पला था,
फिर क्या हुआ ?
फिर मैं बड़ी हो गयी,
धीरे-धीरे अपने पैरों पे खड़ी हो गयी,
पता चला पैसे ऐसे ही नहीं आते,
बहुत मुशकत से है उन्हें हम कमाते,
और आसान नहीं अपनी जेबे भरना,
और उससे भी मुश्किल है ,
मेहनत के पैसे किसीकी ख़ुशी के लिए खर्चना,
पर नानू कैसे ये कर जाते थे,
जरूरते पूरी कर बस वो मुस्कुराते थे,
सच में वो जादूगर ही तो थे,
उनका जादू रोज़ थोड़ा सीखने की कोशिश जारी है,
बस कभी कभी सोचती हूँ,
हमारा अनमोल बचपन चुपचाप चला गया ,
एक बार कुछ कह कर जाता ,
या कुछ वक़्त को लौट ही आता,
तो कहते की कितना प्यारा है वो हमें,
और कितना याद आता है वो हमें  |
- पिंकी झा 
 

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