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इश्क़ भी बड़ा अजीब झमेला है

pinki jhapinki jha August 6, 2022
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इश्क़ भी बड़ा अजीब झमेला है ,

लोगो की भीड़ में भी न मिलता कोई मेरा है |

बचपन में सीखा सब एक है ,

मोहब्त बना माँ-पापा , भाई-बहन से रखनी है |

ठीक ही सब चल रहा था , मन अपने कामों में लगा था ,

पता चला इश्क़, सम्मान, आदर , स्नेह में भी फर्क है |

सहेलियों में भी इसी खबर की लहर थी ,

पुछताछ कर एक दूजे से समझ ले इसकी कोशिश थी |

साफ कुछ पता अभी तक इस विषय में हमें था कहाँ ,

पहुंचनेवाले थे पता चलने वाला था कुछ-सबकुछ वहाँ |

देखा अलग नज़रिये से हमने एक व्यक्ति को ,

समझ गए वो सब जो पहले समझा न था |

समझे की एहसास अलग कोई किसी को देखकर , सोचकर होता है ,

बिन कहे खुद में ही इस समन्दर में इंसान खुद को डुबोता है |

पता चला ये भवर इतना आसान नहीं है,

कूदते सब है , पार जा पाते सब नहीं है |

पड़े इन चक्करों में हम नहीं , ऐसा नहीं कहेंगे ,

न डूब पाए , न तैर पाए इतना ही कहेंगे |

शक अपनी किस्मत पर , कभी अपनी पसंदो पर होता है ,

वरना अबतक अकेले रह जाए , ऐसा थोड़ी होता है |

पाक बहुत ये नाता है अगर मिल जाए , जुड़ जाये किसीसे,

उम्मीद इतनी करती हूँ, सबको मिले इश्क़ किसी न किसी में |


- पिंकी झा 


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