पलट के देखूं शायद's image
Poetry1 min read

पलट के देखूं शायद

Pinak_ModhaPinak_Modha January 22, 2023
Share0 Bookmarks 10 Reads0 Likes

पलट के देखूं शायद अब भी वही खड़ा होगा

झुक के मिला उसका कद मुझसे बड़ा होगा


जंग के वक्त उसकी आंखों में डर न देखा

वो जरूर अपने आखरी दम तक लड़ा होगा


मैं इसलिए ही जीत का जश्न नहीं मना रहा हूं

मुझे पता है मेरा अगला इम्तिहान कड़ा होगा


तू जो इतनी आसानी से गज़ल कहता है 'पिनाक'

वक्त के साथ तेरा भी गम धीमे से बढ़ा होगा


- पिनाक मोढ़ा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts